Wednesday, December 19, 2012

विदेह मैथिली शिशु उत्सव (तिरहुता वर्सन)

तरेगन

मध्य प्रदेश यात्रा

देवीजी

मैथिली चित्रकथा

नताशा

Thursday, November 15, 2012

बाल गजल

चलै चुनमुन चलै गुनगुन तमासा घुमि कए आबी 
जिलेबी ओतए छानैत तोहर भेटतौ बाबी 

पढ़ैकेँ छुटल झंझट भेल इसकूलक शुरू छुट्टी 
दसो दिन राति मेला घुमि कए नव वस्तु सभ पाबी 

करीया बनरिया कुदि कुदि कए नाचै बजाबै बिन 
चलै चल ओकरा संगे हमहुँ नेन्ना कनी गाबी 

बनल मेनजन अछि बकड़ी पबति बैसल अचारे छै 
बरद सन बौक दिनभरि चूप्प रहए पहिरने जाबी    

बुझलकौ आब तोरो होसयारी 'मनु' तँ बुढ़िया गै 
लगोने ध्यान वक कतएसँ सम्पति नीकगर दाबी    

(बहरे हजज, 1222 चारि-चारि बेर सभ पांतिमे)

Tuesday, October 16, 2012

माटिक बासन


केदार प्रसाद गामक एकटा कुशल कुम्हार । माटिक बासन जेना  घैलढाकनमटकुरी बना अपन जीवन यापन करै छलाह । माटिक बासन बनेनाइ मात्र हुनक आजीवकाक साधन नहि भहुनका लेल  एकटा सुन्नर कारीगरी छल । अपन काज करैकाल ओ ऐना तनमय भजाइ छलाह जेना एकटा भक्त अपन अराध्य देवताक ध्यानमे अपन तन-मनक सुधि बिसैर जाइत छैक । ओ अपन स्वं साधनासँ धिरे-धिरे छठि मैयाक सुन्नर व आकर्षित हाथी सेहो बनबए लगला । हुनकर बनाएल माटिक बासन आ छठिक हाथीक बड्ड प्रशंसा होइत छल ।
धिरे-धिरे गामक परिवेश बदलए लागल । माटिक बासनक जगह स्टील आ आन-आन धातु लेबए लागल । केदार प्रसादजीक आमदनी कम होबए लगलन्हि मुदा ओ अपन काजक प्रति  निष्ठा आ समर्पणकेँ दुवारे कुम्हारक काज नहि छोरि पएला ।
हुनक सुन्नर सुशिल बेटा बिभू नेन्नेसँ अपन पुस्तैनी काजमे माँजल । ई कहैमे कोनो संकोच नहि जे ओ अपन बाबूओ सँ बीसे । केदार प्रसादजी एहि गपकेँ नीकसँ  बुझैत अपन होनहार पुतकेँ गुणसँ मोने-मोन खुस छलाह आ चिंतीत सेहो । चिंतीत एहि दुवारे की कुम्हारक काजक कि बर्तमान छैक आ कि भबिष्य हेतै से हुनका बुझल मुदा बिभूक हस्तकौशल देखि ओकरा एहि काजसँ बाहर केनाइ उचित नहि बुझलाह । बिभू सेहो इस्कूल पढ़ाइक संगे-संग अपन बाबूक सभटा गुणकेँ  अंगीकार केने गेल ।  अपन  बाबूक छठिक हाथीसँ आगू बढ़ि ओ मूर्तिकलामे अपन हस्तकौशलक उपयोग करै लागल । ओकर बनाएल मूर्तिक चर्चा गाम  भरिमे होबए लगलै । जतए ओकर बाबूक बनाएल छठिक हाथीकेँ एगारह टाका भेटन्हि ओतए ओकर बनाएल छोट-छोट कनियाँ- पुतड़ा सभकेँ सय-सबासय टाका भेटअ लगलै । बिभू अपन बाबूक देख-रेखमे मूर्तिकलामे दिनो- दिन आगू बढ़ए लागल । आब ओकर बनाएल माए सरोस्वतीकृष्णास्टमीविश्वकर्मा पूजाक मूर्तिक माँग चारूकातक बीस गाम तक होबए लगलै मुदा बिभूक बाबू तैयो ओकर बनाएल मूर्तिमे कोनो ने कोनो दोख निकालि आ ओकरा अओर बेसी नीक मूर्ति बनाबैक प्रेरणा देथिन । बिभू सेहो हुनक गपकेँ मन्त्र मानि आगू आरो नीक मूर्ति बनाबएमे लागि जे ।    
बिभू दसम वर्गकेँ बाद इस्कूली पढ़ाइ छोड़ि पूर्णतः मूर्तिकलामे अपनाकेँ समर्पित कए लेलक । अठारहम बरखक पूर्ण बुझनूक भगेल आब ओकरा नीक बेजएकेँ ज्ञान भगेलै । ओकर मूर्तिक प्रशंषा आब गाम नहिजिला नहि राज स्तरपर होबै लगलै । आब  तँ ओकर बनाएल एक-एकटा मूर्तिकेँ दू-दू तिन-तिन हजार टाका भेटए लगलै । मुदा ओकर बाबू एखनो ओकर मूर्तिमे कोनो ने कोनो दोख निकाइल ओकरा आर सुन्नर मूर्ति बनाबैक निर्देश देथिन । पहिले बिभू हुनक गपकेँ मन्त्र मानि कमी दूर करैक चेष्टामे लागि  जाइ छल मुदा आब हुनक गपसँ ओकर मोन कतौ-ने कतौ आहत होइत छलै । मुदा बिरोध करैक सहाश नहि तेँ मोनकेँ मारि हुनक बताएल निर्देशमे लागि जाइ छल  
जेना-तेना काज आगू बढ़ैत रहल आ ओकर बनाएल गेल मूर्तिक चर्चा आब राजक सीमासँ निकैल बाहर दस्तक देबए लगलै । राजसरकारकेँ गृहमंत्रालयसँ बिभूकेँ पत्र एलै जाहिमे ओकर बनाएल गेल मुर्तिकेँ अखिल भारतीय मूर्ति प्रदर्शनीमे राखक व्यवस्था कएल गेल रहैक । सभटा खर्चा राजसरकारक आ विजेताकेँ देशक सर्वश्रेष्ट मूर्तिकारक सम्मानकेँ संगे-संग एक लाख टाकाक नगद इनाम सेहो ।   ई पत्र पाबि बिभूकेँ बड्ड प्रसंता भेलै । सभसँ पहिले दौरल-दौरल अपन बाबूकेँ एहि गपक सुचना देलक । केदार प्रसादजी सेहो बड्ड प्रसन्य भेलाह हुनकर जीवन भरिकेँ मेहनत रंग लाइब रहल छल । बिभू राति-राति भरि जागि-जागि कए अपन मार्गदर्शक गुरु बाबू संगे लागि गेल ।
एकसँ एक नीक-नीक मूर्ति बनेलक मुदा केदार प्रसादजी सभ मूर्तिमे कोनो ने कोनो कमी निकाइले देथिन । केदार प्रसादजीक बताएल कमीकेँ दूर करैकेँ बदला  बिभूक मोनमे आब नकारात्मक प्रवृति घर करए लगले । हुनक बताएल कमीपर आब ओ सबाल-जबाब करए लागल । काइल्ह प्रतियोगता लेल मूर्ति भेजैक अंतिम दिन आ आइ बिभू अपन बनाएल मूर्ति सभमे सँ एकटा सभसँ नीक मूर्तिकेँ अंतिम रूप देबएमे लागि गेल । केदार प्रसादजी बारीकीसँ ओहि मूर्तिकेँ निरीक्षण करैतबिभूक दिमागमे हलचल चलि रहल छल - "हाँ आब तँ ई कोनो ने कोनो गल्ती बतेबे करता ।"
ततबामे केदार प्रसादजी अपन चुप्पीकेँ तोरैत बजलाह -"सुन्नर ! आइ तक बनाएल गेल मूर्ति सभमे सर्बश्रेस्थ ।कनीक काल चुप रहला बाद फेर -"  मुदा ।"
मुदा की आब  तँ  बिभूक मोन बिफैर गेलै - "अबस्य कोनो ने कोनो कमी गनेता ।"
केदार प्रसादजी अपन गपकेँ आगू बढ़ाबैत -ई जँ एना रहितेए तँ  आरो बेसी नीकआ ई रंग जँ फलाँ फलाँ रहथि तँ  जबरदस्त होइते ।"
नैन्हेटासँ जिनक गपकेँ मन्त्र मानि पूरा करैमे जि-जानसँ लागि जाइ छल आइ हुनक गपकेँ नहि पचा पएलक । बिफैर कए बाजि उठल -"रहै दियौ ! अहाँकेँ  तँ एनाहिते दोख निकालए अबैएअपन बनेएल ढाकन बसनी  तँ कियो एको टाकामे नहि किनैए आ हम केतबो नीक मूर्ति बना लि कोनो ने कोनो दोख अबश्य निकाइल देब ।"
बिभूक गप सूनिते मातर केदार प्रसादजीक शांत मुद्रा भंग भए सोचनीए भगेलनि । एकटा नमहर साँस लैत बिभूक पीठ ठोकैत बजलाह -"बस बेटा बस ! जहिया व्यक्तिकेँ अपन पूर्णताकेँ आभाष भजाइ छैक ओकर बाद ओकर जीवनक विकास ओतहिए रुकि जाइ छैक । पूर्णताकेँ आभास दिमागक आगू बढ़ैक चेतनामे लकबा लगादै छैक ।"
किछु छन चुप्प,दुनू गोटे शांत । बिभूक आँखिसँ नोर टघरैत जे आइ ई की कए लेलहुँओकरा अपन गल्तीक ज्ञान भगेलै । केदार प्रसादजी आगू - "हमर सपना छल जे हमर बेटा राजक आ देशक नहि वरण दुनियाँक सर्वश्रेष्ट मूर्तिकार  बनत.....मुदा नहि । कोनो गप नहि हमराकेँ जनै छल कियो नहि । हमर बेटाकेँ पूरा राज जनैत अछि एकटा नीक मूर्तिकारकेँ रूपमे । हमरा लेल बड्ड पैघ गप अछि । मुदा हमर सपना ------- आब नहि पूरा होएत । ई कहि ओ ओहि कक्षसँ बाहर भऽ गेला ।    
*****
जगदानन्द झा 'मनु'

Saturday, September 29, 2012

करुण हृदयक मालिक महाराज रणजीत सिंह


पंजाब प्रान्तक राजा महाराजामे सँ महाराज रणजीत सिंहक नाम हुनक न्यायप्रियता एवं सुशासनक लेल पसिद्ध छनिएक समयक गप अछिमहाराज रणजीत सिंहजी अपन प्रजाक सुख दुख देखै लेल घोड़ापर सबार अपन सिपाही संगे राज भ्रमपर निकलल रहथि |महाराज सेना सहित रस्तापर आगू  बढ़ैत रहथि की कतौसँ एकटा पाथर उड़ि कआबि महाराजकेँ बिच्चे माथपर लगलनिपाथर लगिते हुनकर माथसँ सोनितक टघार बहए लगलनिमहाराज अपन एक हाथसँ घोड़ाक लगाम पकड़ने, दोसर हाथे चट कपारकेँ दाबि लेलनि |सिपाही सभ पाथरक दिसामे  दौड़लकिछु घड़ी बाद ओ सभ एकटा नअ-दस बरखक फाटल चेथड़ी पहिरने, गरीब नेनाकेँ लेने आएल|महाराजकेँ पुछला उत्तर एकटा सिपाही बाजल जे ई नेना पाथर मारि-मारि कए आम तोड़ै छलओहे पाथर आबि कमहाराजक माथपर लागल महाराज रणजीत सिंह ओ डरैत नेनाकेँ अपना लग बजास्नेहसँ ओकर माथपर हाथ फेरैत एगो सिपाहीकेँ आज्ञा देलनि - "पाँच पथिया आमदू जोड़ी नव कपड़ा आ सटा असरफी लए क नेनाकेँ आदर सहित एकर घर छोड़ि आएल जा|
महाराजक आज्ञाक तुरंत पालन भेल मुदा महाराजक निर्णयकेँ नै बुझि सेनापति, सहास कए क तरहक फैसलाक कारण पुछिए लेलक|सेनापतिक प्रश्नक उत्तर दैत महाराज बजलाह -"जखन एक गोट निरीह गाछ पाथर माला उत्तर फल दरहल छै तखन हम तँ ऐप्रान्तक राजा छीहमर प्रजा हमर पुत्र तुल्य अछि, एहन ठाम हम कोना फल देबसँ वंचित रहि जाइ गाछ अपन सामर्थे फल दै छै, हम अपन सामर्थे, मे अजगुतक कोन गप|
एहन उदारन्यायप्रियवात्सल्य आ करुण ह्रदयक मालिक छलाह महाराज रणजीत सिंह |   
            

शंकल्पक धनी विल्मा रुडोंल्फ




बिल्मा रुडोंल्फक जन्म तेनेसेस शहरकेँ एक गोट गरीब परिवारमे भएलैंह | चारि बरखक अबस्थामे डबल निमोनियाँ आओर कालाजारक प्रकोपक संगे-संगे ओ पोलियोसँ ग्रस्त भs गेलिह | ओ अपन दुनू पएरकेँ सहारा देबैक लेल ब्रैस पहिरैत छलिह | डाक्टर  तँ  एते तक कहि देलकैन्ह जे ओ जीवन भरि अपन पएर सँ चलि फिर नहि सकतिह, मुदा हुनकर माए हुनका हिम्मत बढ़ेलखिन्ह आ कहलखिन्ह -"दृढ़ शंकल्प, लगन,  कठिन मेहनत सँ जे कोनो काज कएल जाए भगवान ओकरा अवश्य पूरा करैत छथिन्ह |'' इ गप्प सुनि विल्मा निश्चय कएलैन्ह जे ओ दुनियाँकेँ सभसँ तेज धाविका बनतिह |
नअ बरखक अबस्थामे डाक्टरक मना कएला बादो ओ  अपन पएरक ब्रैस उतारि कs अपन पहील डेग जमीनपर बढ़ेलीह | १३ बरखक अबस्थामे अपन पहील दौड़ प्रतियोगतामे भाग लेलैन्ह आ सभसँ पाछू रहलीह | ओकर बाद दोसर, तेसर, चारिम, पाँचम प्रतियोगता सभमे भाग लैत रहलीह आओर सभसँ अन्तिम स्थानपर आबैत रहलीह | आ इ प्रयास ताबत तक रहलैन्ह जाबत कि ओ दिन नहि आबि गएल जहिया ओ प्रथम एलीह
१५ बरखक अबस्थामे विल्मा टेनिसी स्टेट यूनिवर्सिटी गएलीह, जाहि ठाम हुनक भेट एडटेम्पल नामक एकटा कोचसँ भेलैन्ह | हुनका ओ अपन मोनक इच्छा बतेलीह, जे ओ दुनियाँकेँ सभसँ तेज धाबिका बनऐ चाहैत छथि | हुनक दृढ़  इच्छा शक्तिकेँ देखैत टेम्पल हुनक कोच बनब स्वीकार कएलैन्ह |
अंतमे ओ शुभ दिन आएल जहिया विल्मा ओलम्पिकमे भाग लs रहल छलीह | ओलम्पिकमे दुनियाँकेँ सभसँ तेज दौड़ए बला सभसँ मुकाबला रहैत छैक | विल्माक मुकाबला जुताहैनसँ छलैन्ह जिनका कियो नहि हरा पएने छल |  पहील दौड़ १०० मीटरकेँ छल जाहिमे बिल्मा जुताहैन केँ हरा कs पहील स्वर्णपदक जितलीह | दोसर दौड़ २०० मीटरकेँ एहुमे विल्मा, जूताकेँ दोसर बेर हराकए अपन दोसर स्वर्णपदक जितलीह | तेसर आ अन्तिम दौड़ ४०० मीटर रिले रेस छल आ विल्माक सामना एकबेर फेरसँ जुतासँ छलैन्ह | एहि अन्तिम आ निर्णायक दौड़मे टीमक सभसँ तेज धाबिकाकेँ बिच सामना छल | दुनू टीमसँ चारि चारिटा सर्बश्रेष्ठ धाविका, करू अथवा मरुक मुकाबला | विल्माक टीमकेँ तीनटा धाविका  रिले रेसकेँ  शुरूआती  तिन हिस्सामे दौड़लीह अ आसानीसँ बेटन बदललीह | जखन विल्माकेँ दौड़क बेर एलैन्ह तँ हुनकासँ बेटन छूटि गएलैन्ह मुदा ओ अपनाकेँ सम्हारैत, खसल बेटन शिर्घतासँ उठाबैत मशीन जकाँ  तेजीसँ दौडैत जुताकेँ तेसरो बेर हरा कs तेसर गोल्ड मेडलक संगे-संगे दुनियाँकेँ नम्बरएक धाविका बनि अपन सपना पूरा करैत इतिहासक पन्नामे अपन नाम स्वर्ण अक्षरसँ  लिखेलथि |
ई अमीट इतिहास १९६० कए ओलम्पिककेँ अछि जाहिमे एकटा लकबाग्रस्त महिला दुनियाकेँ  सर्वश्रेष्ठ धाविका बनल छली | एहेन सफल व्यक्तिक खिस्सासँ अपनों सभकेँ मोनमे सफलता प्राप्तिक लालसा अबस्य जागल होएत | कठिनाई सफलताक पहील सीढ़ी छैक,   दृढ़ शंकल्प आ विश्वासक संग डेग आगु  तँ बढ़ाऊ सफलता अहाँक चरण चूमत |

Sunday, September 23, 2012

बाल उपन्यास (तरहरिमे परीलोक- गजेन्द्र ठाकुर)




बाल उपन्यास
तरहरिमे परीलोक

आंगुरक संकेतसँ अक्षर भावक निर्देश करै छलि बा, अक्षरमुष्टिका।
बा कहै छली- आंगुरसँ पकड़ि पिनसिन सँ अक्षर आ चित्र बनाउ, नीकसँ। अहूँ नीक आखर, नीक भाव बना सकब।


बा- सुति जाउ, भोरे स्कूल जएबाक अछि। आइ हम थाकल सेहो छी।
ओम- बा पहिने खिस्सा सुनाउ? बहन्ना नै चलत। (ओम आँ-आँ… कऽ कए कानऽ–रुसऽ लगैए।)
बा- ठीक छै, ठीक छै। कोन खिस्सा? राजाबला, परीबला आकि..
ओम- परीबला।
बा- ठीक छै, ठीक छै।(सोचैत) तरहरिमे परीलोक, गाछक धोधरि, कारी कौआ, उज्जर दपदप परीलोक….।
ओम- ठीक छै तखन खिस्सा शुरू…
बा:
चन्ना गाछीक झमटगर बोन
चन्ना गाछीक झमटगर बोनमे आम बिछैत-बिछैत आस्था आगाँ बढ़ि गेलि। तखने एकटा कार कौआ काँउ-काँउ करैत एलै।
बोनमे एकटा झमटगर गाछक नीचाँ आस्था ठाढ़ भऽ गेलि। ओइ गाछमे एकटा धोधरि रहै।
ओइ कार कौआक काँउ-काँउ सुनिते देरी ढेर रास कार कौआ आबि गेलै। आस्था जल्दीसँ धोधरिमे पैसि गेल। धोधरिमे जाइते देरी ओकरा किछु अनसोहाँत सन लगलै।
ओकरा लगलै जे ओ अकासमे ठाढ़ अछि। धोधरिमे ओ ऊपर देखलक, नीचाँ देखलक। ओकरा लगलै जे ओ धोधरिमे स्थिर ठाढ़ अछि, फेर ओकरा लगलै जे ओ कहीं नीचाँ तँ नै जा रहल अछि!
ओकरा लगलै जे ओकरा देहमे कोनो भार नै छै। ओ दूभियोसँ बेशी हल्लुक भऽ गेल छलि।
दू घण्टाक बाद….
उज्जर दपदप परीलोक सन एकटा जगहपर ओ आबि कऽ खसलि। मुदा ओतए कोनो गद्दा राखल रहै, से ओकरा कनेको चोट नै लगलै।
की परी लोक निकास रहै ओ धोधरि?
तखन तँ कतेक आर लोक, माल जाल, चिड़ै ओतऽ सँ खसैत हेतै, बिला जाइत हेतै।– आस्था सोचैत रहलि।
आ तेँ लोक चन्ना गाछीकेँ भुतहा गाछी कहै छै!
आस्था आँखि घुमेलक।
जगह तँ नीके लागै छलै।
ऊपर तकलक तँ धोधरि नै देखा पड़लै, अकास रहै चारू कात। नील अकास नै उज्जर अकास।
तखने एकटा चिड़ै ओतऽ आएल।
-हम छी टुराकोस चिड़ै। हम अफ्रीकासँ आएल छी।
-हम छी आस्था। हम एशियासँ आएल छी। अहाँ चिड़ै भऽ कऽ मनुक्खक बोली कोना बाजै छी?
-ई छी परीलोक। एतऽ एलाक बाद सभ एकबैग मनुक्ख जकाँ सोचऽ लगैए, बाजऽ लगैए। (ई कहैत टुराकोस आस्थाक कन्हापर बैसि गेल।)
-माने जखन अहाँ अफ्रीकामे छलौं तखन अहाँ मनुक्खक बोलीमे नै बाजै छलौं।
-नै।
हरियर रंगक पाँखिबला टुराकोसक उड़ैबला पाँखिक रंग लाल रंगक रहै।
तखने बर्खा जोरसँ हेबऽ लगलै।
टुराकोसक देहसँ जे पानि खसलै से लाल रंगक रहै, आस्थाक हाथपर लाल रंग लागि गेलै।
-अहाँ होली खेलाएल छी की?
-नै किए?
-ई लाल रंग अहाँक पाँखिसँ झड़लए।
-हमर हरियर रंग पकिया अछि मुदा लाल रंग पानिमे झड़ऽ लागैए।
-से? हमरा तँ लागल जे ई लाल रंग अहाँकेँ कियो लगा देनेए।
-नै, ई लाल रंग हमर पाँखिक रंग छी।
-एतऽ हम अपन गामक चन्ना गाछीक एकटा गाछक धोधरिसँ खसल छी। एतएसँ बाहर निकलैक कोनो रस्ता छै की?
-सएह रस्ता तँ हमहूँ ताकि रहल छी।
दुनू गोटे परीलोकमे आगाँ बढ़ल।
प्रकाश चारू दिस पसरल रहै।
-धोधरिमे प्रकाश कोना आएल?
-धोधरिमे जे प्रकाश अछि से आँखिमे कुटकुटा कऽ लगितो नै अछि आ कोनो सूर्य सेहो एतए नै अछि।
-तखन प्रकाश अबैए कतऽ सँ?
तितली (दू पाँखिबला रंग बिरंगक, नांगरि रहित) टिकुली (चारि पाँखिबला, नांगरि युक्त) सेहो ओतऽ आबि गेल। चारू गोटे आगाँ गेलथि।
जखन आस्था रस्तापर चलि रहल छलि तँ ओकरा लागलै जे एतऽ तँ घर्षण छैहे नै। चिक्कन साफ सड़क। नै किछु तँ सए किलोमीटर प्रति घण्टाक गतिसँ सभ चलि रहल छल। दौगत तँ कतेक तेजीसँ दौगत?
-टुराकोस, ई प्रकाश जँ सूर्य प्रकाश नै अछि तखन कोन प्रकाश अछि? कार्बन डाइऑक्साइड गाछक पातक पातर छिद्र-स्टोमेटासँ प्रवेश करैए, पानि आ खनिज गाछक जड़िसँ प्रवेश करैए, सूर्य किरिगाछक पातसँ प्रवेश करैए। परिणाम ऑक्सीजन प्रक्रियाक अवशेष रूपमे पातसँ बहराइए गाछक चिन्नी फलसँ बहार होइए। सूर्यकिरण प्रोटीन द्वारा सोखि लेल जाइत अछि, गाछ-बृच्छमे क्लोरोप्लास्ट द्वारा आ बैक्टीरियामे प्लाज्मा मेम्ब्रेन द्वाराजँ सूर्य प्रकाश नै अछि तखन एतुक्का ऊर्जा कतएसँ अबैए?
-अहाँ पढ़ैमे खूब तेज छी। एतए एहने लोक सभक आवश्यकता छै। सभ प्रश्नक उत्तर अहाँकेँ भेट जाएत।
-ऐ लोकमे की सभ छै टुराकोस?
-ऐ लोकमे खेत छै, मुदा ओतऽ धान गहूम नै उपजै छै, ओतऽ ऊर्जाक खेती होइ छै। बिना सूर्य प्रकाशक ऊर्जाक खेती। एतऽ रेगिस्तान सेहो छै। एतऽ एकटा बड़का टा रेगिस्तान छै, ऐ परीलोकक उत्तरबरिया महारक ओइपार ई रेगिस्तान छै।
- उत्तरबरिया महार?
-हँ। ऐ लोकक उत्तरमे उत्तरबरिया महार छै। तकर ओइपार रेगिस्तान छै। सुनै छिऐ, ओतऽ पहिने खेत छलै। मुदा जहियासँ एतुक्का रानी ओइ इलाकामे कूड़ा-कचरा फेकबाक आदेश देलनि, ओइ दिनसँ ई इलाका सुन्ना हेबऽ लागल आ आब तँ ई रेगिस्तान भऽ गेल अछि।
-आ ई महार कहिया बनल?
-जखन रानी ई आदेश देलन्हि तहिये ई महार बनाओल गेल। ऐसँ कूड़ा-कचरा फेकबाक स्थान फरिछाबैमे सुविधा भेल।
तखने एकटा भयंकर साँप सोझाँ आबि गेल।
आस्था डरा गेलि।
-नै डराउ। ई ओना तँ सभसँ बेशी बिखबला मम्बा साँप अछि मुदा ई हमर अपन अफ्रीकाक अछि। ऐ परीलोकमे जेना सभ मनुक्खक बोली बाजऽ लगैए, तहिना एतऽ सभक बिख सेहो खतम भऽ जाइए।
मम्बा सिसकारी दैत भारी अबाजमे बाजल- परीलोकमे अहाँक स्वागत अछि।
तखने एकटा हँसैबला नढ़िया आबि गेल।
-ई के छी?
-ई छी कूकाबुरा। आस्ट्रेलियासँ ई एतऽ आएल अछि। ई हरदम हँसिते रहैए।
कूकाबुरा खिखिया कऽ हँसऽ लागल- खी-खी-खी।
-आस्ट्रेलिया, अफ्रीका आ एशियासँ ऐ परीलोकमे? हम तँ धोधरिसँ एलौं आ अहाँ सभ।
-हमहूँ सभ धोधरिसँ एलौं। (ऐ बेर तितली, टिकुली, कूकाबुरा, मम्बा आ टुराकोस एकट्ठे बाजल।)
कूकाबुरा हँसैत बाजल- एतऽ परीलोकमे आर्कटिक, अण्टार्कटिक, एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका आ अफ्रीकासँ धोधरि बनाओल गेल छै।
कूकाबुरा फेरसँ हँसऽ लागल।
आस्था पुछलक- आ बाहर निकलबाक कोनो उपाए?
मम्बा बाजल- सुनिते छिऐ जे बाहर निकलै लेल औंठा आ आँखिक पहचानक आधारपर कोनो बाहरी निकास छै, जइसँ एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका, आर्कटिक आ अण्टार्कटिक ऐ सभ ठाम बहार भेल जा सकैए।
आस्था अकचकाइत पुछलक- आँखि आ औँठाक पहचान? माने फिंगरप्रिन्ट आ कोर्निया आइडेन्टिफिकेशन (पहचान)? से किए?
मम्बा बाजल- हँ, फिंगरप्रिन्ट आ कोर्निया आइडेन्टिफिकेशन। कारण से नै भेलासँ एशियाक लोक अण्टार्कटिका पहुँचि जाएत आ से भेने तँ गड़बड़ हएत।
-की गड़बड़ हएत?
-बड्ड गड़बड़ हएत। जेना आर्कटिक केँ लिअ। ओतऽ उत्तर ध्रुवपर कहियो राति नै होइ छै। एकटा एस्कीमो भेटत, से कहत अहाँकेँ। तहिना अण्टार्कटिकमे दक्षिण ध्रुवपर कहियो दिन नै होइ छै। एकटा पेंग्यूइन भेटत, से कहत अहाँकेँ।
तखने एस्कीमो आ पेंग्यूइन दू कातसँ एलै। नमस्कार पाती भेलै।
-एतुक्का लोक की करैए?
टुराकोस बाजल- एतुक्का लोक सदिखन कोनो ने कोनो प्रयोगमे लागल रहैए। बिना सूर्य प्रकाशक ऊर्जा कोना निकाली? बिन प्रकाशक जीवन कोना जीबी?
-बिन सूर्यक प्रकाश! ठीके, एतऽ तँ सभ दिस प्रकाशे छै। मुदा तखन अन्हारपर कोना प्रयोग होइ छै?
-उत्तरबरिया महारक उत्तरमे जे रेगिस्तान अछि ओतए रानीक आदेशक बाद अन्हारे अन्हार छै।
आब सड़कपर चहल-पहल शुरू भऽ गेल छल। परी लोकमे कनियाँ-पुतरा सन परी सभ चारू कात घूमि रहल छली। घर-दुआर सभ सेहो रंग-बिरंगक छल। अकासक सात रंगबला पनिसोखा सोझाँ देखा पड़ि रहल छल। एक लाइनमे भटरङ, असमानी, नील रङ, हरिअर, पीअर, संतोला रंग आ लाल टुहटुह रंगक सातटा कियारी देखा पड़ल।
-ई की छी टुराकोस?
-ई परीलोकक मुख्यालय आ आवास छी।
-अच्छा, की सभ छै ऐमे?
-भटरङ बला कियारीमे वैज्ञानिक सभ रहै छथि। असमानी बला कियारीमे जे असमानी रङक मकानक पाँती छै ओइमे परीलोकक सैन्य विभाग छै। नील रङक जे मकानक कियारी बुझा रहल अछि ओइमे बच्चा सभक स्कूल छै, बुझू पहिला वर्गसँ विश्वविद्यालय धरि। हरियरका पाँतीमे वनस्पतिपर शोधक प्रयोगशाला सभ छै। पीअर रङक पाँतीमे मालजाल, मनुक्ख, परी आदिपर शोधक प्रयोगशाला आ अस्पताल छै। संतोला रङक पाँतीमे मानसिक आ शारीरिक रूपसँ कमजोर मनुक्ख, परी, चिड़ै, जानवर आ वनस्पति सभपर शोध लेल प्रयोगशाला छै। ई पाँती सभसँ पैघ छै आ एतऽ…
बीचेमे आस्था टुराकोसकेँ टोकलक- मानसिक आ शारीरिक रूपसँ कमजोर वर्गमे वनस्पति सेहो अछि? से कोना? शारीरिक तँ बुझलौं मुदा मानसिक?
टुराकोस बाजल- एतऽ प्रगति बड्ड तेजीसँ भेलै, से वनस्पति सेहो मनुक्ख आ आन प्राणी जकाँ बाजऽ भुकऽ आ सोचऽ लागल। ओ खाली चलि नै पबैए, सएहटा कमी छै, मुदा तकरो प्रयास भऽ रहल छै। सुनै छिऐ जे प्रयोगशालामे एकाधटा गाछ चलऽ लागल छलै आ ओइमेसँ एकाधटा पड़ा गेलै, अन्हार लोक दिस, महारक ओइपार पड़ा गेलै।
-आ ई लाल टुहटुह रंगक पाँती की छिऐ?
मम्बा बाजल- ई छिऐ परीलोकक बसिन्दाक निवास स्थान। ई सातो पाँती साँप सन टेढ़-टूढ़ भऽ सौंसे परीलोकमे पसरल अछि।
सभ कियो आगाँ बढ़ैत रहल।
आस्थाकेँ लगलै जे ऐ परीलोकमे सभ किछु साफ-सुथरा छै। सड़क, चौबटिया, गाछ-बृच्छ, मालजाल, आब ई सभ चारूकात देखा पड़ि रहल छलै। आस्थासँ सभ नमस्कार पाती कऽ रहल अछि, सभ मनुक्खक बोली बाजैए-बुझैए।
ऐ लोकमे सभ किछु संतुलित बुझा पड़ि रहल छै।
गाछक पात सभ गोल-गोल, डाढ़ि-पात सभ सेहो लगै छै जे कियो कतरने छै, अनुपातमे। सभ किछु अनुपातमे लागि रहल छै, नै कनियो पैघ आ नै कनियो छोट।
मुदा आस्था तखने किछु अकानलक- हवा तँ लगैए जे एतऽ बहिते नै छै। पात सभ एक्कोरत्ती हिलियो नै रहल छै।
-एम्हुरका गाछक पात नै हिलत। हरिअरका पाँतीबला मकानक दुनू कातमे जे गाछ सभ छै ओतऽ हवाक व्यवस्था विशेष परखनलीसँ कएल गेल छै। ओतऽ पात हिलैत भेट जाएत। शेष परीलोकमे ई पात सभ हिलैत नै भेटत।
तखने सड़कक बीचमे एकटा बड़का दरबज्जा प्रकट भेलै, ओतऽ सातो रङक सातटा फाटक रहै।
टुराकोस बाजल- सभ अबै जाउ लाल टुहटुह फाटक लग। आस्थाकेँ भेँट करै लेल रानीक महल जाए पड़तै आ ओतऽ जेबाक यएह रस्ता छै।
लाल रंगक दरबज्जापर लाल रंगक पंखक फ्राक पहिरने सभ बैसल छै।
-एतऽ जइ रङक दरबज्जा छै, तइ रङक कपड़ा, फर्नीचर आदि सेहो रहैत छै।, टुराकोस बाजल।
-आउ आस्था, रानी अहाँक प्रतीक्षामे छथि।, दरबज्जापर स्वागतमे बैसल महिला बजली।
-अहाँकेँ हमर नाम कोना बुझल अछि आ रानी हमर इन्तजारीमे कोना छथि? आ हम तँ धोधरिमे खसल रही आ ऐ परीलोकमे अनचोक्के आबि गेलौं। अहाँक नाम की छी?
-अहाँकेँ कोना बुझल भेल जे ई परीलोक छी?
-एतऽ चारू कात सभ चीज अनुपातमे छै। अहाँक आ एतुक्का आन लोकक पहिराबा सभ किछु ओहने छै जे हम सभ अपन किताबमे पढ़ै छलौं।
-तहिना ऐ परीलोकक कोनो धोधरिसँ जखने कियो खसैए, तखने ओकर रेकॉर्ड शुरू भऽ जाइ छै। एतऽ सभ गतिविधि भटरङ प्रयोगशालाक माध्यमसँ रानीक मुख्यालयमे अबै छै। धोधरिसँ खसल प्राणीक सूचना विशेष रूपसँ रानी तत्काले मंगबै छथि। हमर नाम वनसप्तो ९९९९५७४५ छी।
-वनसप्तो तँ पाँखिबला गाएकेँ कहल जाइ छै जे खिस्सामे अकासमे उड़ैए। बोनमे जे बच्चा रस्ता बिसरि जाइए ओकरा वनसप्तो घर घुरबै छथि।
-ऐ लोकमे वनसप्तो सत्तेमे छथि। हम जखन जंगल जाइ छी तँ पाँखिबला गाए बनि जाइ छी। जे सभ अहाँ सभ खिस्सामे पढ़ै छी से सभ एतऽ सत्य छै।
-अहाँक नाममे ९९९९५७४५ किए लागल अछि?
-एतऽ अही तरहेँ नामकरण होइ छै। हमर बाद जे जन्म लेलक ओकर नाम वनसप्तो ९९९९५७४६ भऽ गेलै।
रानीक लाल टुहटुह पाँतीमे जाइ लेल सभ कियो आगाँ बढ़ै गेला।
लाल टुह-टुह पाँतीमे जाइते एकटा स्वागत कक्ष आबि गेल जे नहिये जमीनपर रहए आ नहिये अकासमे!
कारण अकासमे रहितै तँ आस्था खसिये पड़ितए! मुदा से नै भेलै। ओतऽ सभकेँ एकात कऽ एकटा लाल रंगक परी आस्थाकेँ एकटा स्वागत कोठलीमे लऽ गेल।
बिन अन्हारे ओइमे साँझ जकाँ लगलै आस्थाकेँ। ओकरा लगलै जे ओकरा निन्न आबि रहल छै, ओ ओंघाए लागलि। ओकरा लगलै जे जखने ओकरा ओंघी लागऽ लगलै तखने हवा संगे किछु नाक बाटे ओकरा मुँहमे जा रहल छै। हवा संगे!! ओकरा बुझेलै जे ओ जखनसँ परी लोकमे अछि तखनसँ साँस लेनहिये नै अछि, तँ की नाकक उपयोग एतऽ हवा सन कोनो चीजक माध्यमसँ खेनाइ खुआबै लेल होइ छै?
तखने आस्थाकेँ निनिया लागि गेलै।


सुतलासँ उठलापर
आस्था चकित भऽ गेल छलि। ओकरा लगलै जे ओ जे किछु सपनामे केने छलि से जगलापर सोझाँ छलै।
-ऐ परीलोकमे सुतलमे सपनामे कएल काज सेहो सत्य भऽ जाइ छै?
आस्था सपनामे देखने छलि जे ओ धोधरिसँ बहरा गेल अछि आ ढेर रास समान घरसँ आनि हेलीकॉप्टरपर चढ़ि फेरसँ धोधरिमे ढुकि गेल अछि।
दवाइ, खिलौना, एक्सरे-मशीन, चक्कू, फल, बर्तन, तराजू, पहिया, पेचकस, एना, फटक्का, डिब्बामे पैक कएल खाइ लेल केक, बिस्कुट आ हेलीकॉप्टर। हँ, हेलीकॉप्टरपर राखि कऽ ई सभ समान ओ अनने छलि।
अपन ऐ स्वागत कक्षमे सपनामे ओ बर्तन, फल, डिब्बामे पैक कएल खाइ लेल केक आ बिस्कुट रखने छलि, से सभ जगलापर ओ सोझाँमे देखलक! ओ सपनामे सभ समान हेलीकॉप्टरेमे छोड़ि कऽ एतऽ आबि गेल छलि, मुदा बर्तन, फल, डिब्बामे पैक कएल खाइ लेल केक आ बिस्कुट कनी-कनी आनि लेने छलि।
टुराकोस, मम्बा, एस्कीमो, तितली, टिकुली, कूकाबुरा आ पेंग्यूइन स्वागत कक्षमे आबि जाइ गेल।
टुराकोस आस्थाकेँ आश्चर्यसँ आँखि खोलने देखलक।
टुराकोस बाजल- हमरा सभकेँ रानीक आदेश भेटल अछि। ऐ लोकमे सपनामे कएल काज सत्य भऽ जाइ छै आस्था। तेँ एतुक्का रानी दुनियाँक सभ महादेशक सभ तरहक प्राणीकेँ एतऽ मंगबै छथि। ओतुक्का लोक अपन-अपन सपनामे बहुत रास बौस्त-जात एतऽ लऽ अनैए। किछु समस्या छै एतऽ, ओ एकाधटा गाछ जे चलऽ लागल छै… से किछु आफद अनतै एतऽ। किछु विचित्र-विचित्र गप सुनै छिऐ।
मम्बा अपन भारी सिसकारी दैत अबाजमे बाजल- आर की की अनने छी आस्था, आ कतऽ कतऽ रखने छी?
आस्था मोन पाड़ैत बाजल- हँ, ऊँ…। हम हेलीकॉप्टर अनने रही आ ओकरा ओइपार लऽ गेल रही।
टुराकोस बाजल- ओइपार, माने महारक ओइपार?
आस्था- हँ।
टुराकोस, मम्बा, एस्कीमो, तितली, टिकुली, कूकाबुरा आ पेंग्यूइन एक दोसराक दिस ताकऽ लागल।
कूकाबुरा, जे कनी काल पहिने धरि खी-खी हँसै छल, पहिल बेर चिन्तित आ गम्भीर देखा पड़ल। कूकाबुरा बाजल- जल्दी चलू आस्था, महारक ओइपार जल्दीसँ चलू। किछु आफद आबैबला अछि। ओ एकाधटा गाछ जे चलब सीखि लेने अछि, से ऐ हेलीकॉप्टर संगे किछु अनहोनी नै कऽ दिअए। सभ गोटे दौगू।
कूकाबुरा हँसिते रहैए। मुदा जखन ओ चिन्तित आ गम्भीर होइए तखन बुझू जे किछु आफद आबऽ बला छै।
टुराकोस, मम्बा, एस्कीमो, तितली, टिकुली, कूकाबुरा आ पेंग्यूइन आगू दिस दौगल आ आस्था ओकर पाछाँ गेलि।
स्वागत कक्षसँ बाहर अबिते एकटा बाइपास सन सड़कपर सभ गोटे दौगि रहल छल।
आस्थाकेँ लगलै जे ओकर सभक गति हजार किलोमीटर प्रति घण्टा तँ हेबे करतै।
जखन चलब सए किलोमीटर प्रति घण्टा रहै तँ दौगब तँ हजार किलोमीटर प्रति घण्टा ठीके छै।
एक घण्टा धरि सभ गोटे दौगैत रहला, तखने कूकाबुरा अकासमे ऊपर माथे कूदल।
कूकाबुराक अकासमे कूदब माने गति कम करबाक संकेत।
सभ अपन-अपन दौगनाइक गति घटबऽ लगला। सोझाँमे महार देखाइ पड़लै।
सभ गोटे दौगबाक बदला झटकारि कऽ चलऽ लगला आ आस्ते आस्ते सभ गोटे सए किलोमीटर प्रति घण्टाक सामान्य गतिसँ चलऽ लगला।

महारक ओइपार
कनिये कालमे महार आबि गेल। ऊँच महार।
आस्था पुछलक- ओइपार जाएब कोना?
टुराकोस, मम्बा, एस्कीमो, तितली, टिकुली, कूकाबुरा आ पेंग्यूइन एक्के संगे हँसऽ लागल।
एस्कीमो बाजल- टुराकोस भटरङ बला कियारीक वैज्ञानिक सभ लग रहैए, मम्बा असमानी बला कियारीमे सैन्य विभाग संग रहैए, हम नील रङक मकानक कियारीमे बच्चा आ विद्यार्थी सभक संग रहै छी, तितली हरियरका पाँतीमे वनस्पति शोध प्रयोगशालामे रहैए, टिकुली पीअर रङक पाँतीमे मालजाल, मनुक्ख, परी आदिपर शोधक प्रयोगशाला-सह-अस्पतालमे रहैए, कूकाबुरा संतोला रङक पाँतीमे मानसिक आ शारीरिक रूपसँ कमजोर मनुक्ख, परी, चिड़ै, जानवर आ वनस्पति सभपर शोध लेल प्रयोगशालामे रहैए। पेंग्यूइन परीलोकक बसिन्दाक लाल पाँतीमे रहैए। ओइपार गेनाइ हमरा सभकेँ सिखाओल गेल अछि।

तितली बाजल- ऐ महारक ओइपार वनस्पति खतमे जकाँ छै। हम ओतऽ किछु प्रयोग करब आ ओइ एकाधटा भागल वनस्पतिक गतिविधिकेँ नियन्त्रित करबाक प्रयास करब।
टुराकोस बाजल- हमहूँ महारक ओइपारमे हेलीकॉप्टर आ आन यन्त्रक तकनीककेँ ओइ अति विलक्षण आ तीव्र बुद्धिबला मुदा अस्थिर बुद्धिबला भागल-चलैबला वनस्पतिक हाथमे नै जाए देब।
टिकुली बाजल- मालजाल, मनुक्ख आ परीमे सेहो ओइ भागैबला-चलैबला वनस्पतिक लक्षण नै आबि जाए, से हम देखब।
पेंग्यूइन- हमरा रानी परीलोकक बसिन्दाक लाल पाँतीमे कोनो तरहक संक्रमण वा आक्रमण रोकबा लेल पठेने छथि। रानीसँ ककरो आइ धरि भेँट नै भेल छै, मुदा संदेश आएल छल।
कूकाबुरा खी-खी हँसैत बाजल- ई भागल वनस्पति महारक ओइपार हेलीकॉप्टरसँ कोनो तेहेन तकनीक नै निकालि लिअए जे ओइसँ ककरो नोकसान भऽ जाए आ ई परीलोक संकटमे पड़ि जाए। मानसिक आ शारीरिक रूपसँ कमजोर मनुक्ख, परी, चिड़ै, जानवर आ वनस्पतिक प्रयोग ओ सभ ऐ लेल कऽ सकैए, कारण हिनका सभकेँ ठकि-फुसिया कऽ ओ सभ अपन काज सुतारऽ चाहत।
कूकाबुराकेँ हँसैत देखि दोसर सभ गोटेकेँ भरोस भेलै। ओ जखन गम्भीर होइए तँ सभ घबड़ा जाइए।
कूकाबुरा आस्थासँ पुछलक- आस्था, अहाँकेँ मोन अछि जे महारक ओइपार कतऽ अहाँ हेलीकॉप्टर रखने रही?
आस्था- हम?
कूकाबुरा खी-खी हँसैत बाजल- हँ हँ, सपनामे। किछु मोन अछि?
आस्था- ओतऽ अन्हार तँ रहै, मुदा जखने हम हेलीकॉप्टर उतारैत रही तखने ठनका ठनकलै आ जोरसँ बिजलौका लौकलै, रेत सभ बुझेलै जे पघिल कऽ बहऽ लगलै। ओतऽ पघिलल बालुसँ शीसाक बड़का प्लेटफॉर्म बनि गेलै आ ओइपर हेलीकॉप्टर उतरि गेल। शीसामे हम अपन आ हेलीकॉप्टरक मुँह सेहो देखने रही। मुदा ओ तँ सपना रहै।
टुराकोस बाजल- एतऽ सपना सत्य भऽ जाइ छै। मुदा ऐ लोकमे ठनका, बिजलौका?
कूकाबुरा गम्भीर भऽ गेल- नै जानि ओ भागल-चलैबला वनस्पति की करत?
आस्था पुछलक- मुदा जँ ओ सभ एकाधे टा अछि तखन कोन चिन्ता।
टुराकोस बाजल- एकाधे टा सँ डारि खसा कऽ कतेक रास चलैबला-वनस्पति बनि जाएत। मुदा महारक ओइपार रेत छै, तेँ सम्भव अछि जे ओतेक जल्दी तँ एकसँ एक्कैस तँ ओ सभ नहिये बनि सकत।
टुराकोस आगाँ बढ़ल आ एकटा गुप्त तरहरिक द्वार लग आबि कऽ ठाढ़ भऽ गेल। एकटा पैघ शिलाकेँ ओ कंगुरिया आंगुरसँ उठेलक।
आस्था आश्चर्यमे पड़ि गेलि- तरहरिमे तरहरि!
तरहरिमे ठीके सातटा तरहरि छलै। टुराकोस भटरङ, मम्बा असमानी, एस्कीमो नील, तितली हरियर, टिकुली पीअर आ कूकाबुरा संतोला रंगक तरहरिक दरबज्जामे चलि गेल। पेंग्यूइन आस्थाकेँ इशारा केलक आ लाल रंगक तरहरिमे चलि गेल।
पेंग्यूइन आस्थाकेँ कहलक- जेना रतिचर रातिमे घुमैत अछि आ दिनमे चोन्हरा जाइए, तहिना महारक ओइपार जाइ लेल हमरा सभकेँ विशेष उपकरण आ सुरक्षा उपकरण चाही। तखने हम अन्हारमे देखि सकब आ ओइ चलैबला-वनस्पतिक दिमागमे पैसि कऽ देखि सकब जे ओ हेलीकॉप्टर आ ओकर भीतरक समानसँ की-की करऽ चाहि रहल अछि।
आस्था आ पेंग्यूइन विशेष ड्रेस आ सुरक्षा उपकरण पहीरि कऽ तरहरिक गुप्त मार्गसँ बहराइ गेला तखने टुराकोस भटरङ, मम्बा असमानी, एस्कीमो नील, तितली हरियर, टिकुली पीअर आ कूकाबुरा संतोला रंगक तरहरिक गुप्त दरबज्जासँ निकलै जाइ गेला।
सोझाँमे महारक ओइपारक अन्हारमे सभ किछु खाली-खाली छल।
टुराकोस आस्थासँ पुछलक- आस्था, हेलीकॉप्टरक तकनीकी जानकारी कने विस्तारसँ दिअ।
आस्था सभकेँ सम्बोधित करैत बाजल- ऐमे चढ़ै-उतरैबला सीढ़ी होइ छै से तँ अहाँ सभकेँ बुझले हएत। हेलीकॉप्टर उतरै काल एकटा ढाँचापर उतरैए, जे हेलीकॉप्टरेमे लागल रहै छै। ओ बड्ड मजगूत होइ छै। धबसँ हेलीकॉप्टर नीचाँमे खसैए मुदा तैयो ओकरा कोनो नोकसानी नै पहुँचै छै। ई हवाइ जहाजसँ किछु मामिलामे बेशी कारगर होइए, अपन विशेष इन्जिन आ पंखाक मदतिसँ ई सोझे ऊपर माथे उड़ैए आ सोझे नीचाँ माथे नीचाँ उतरैए। हवाइ जहाज जकाँ एकरा उड़ै लेल दूर धरि दौगऽ नै पड़ै छै। हेलीकॉप्टर एकटा विशेष ईंधनसँ चलै छै।
कूकाबुरा गम्भीर भऽ जाइए आ संगे सभ कियो गम्भीर भऽ जाइए।
आस्था उत्तर पूर्वी दिशा दिस आंगुर देखबैत कहैत अछि- सपनामे लागल रहए जे रेगिस्तानमे बिजलौका ओइ दिशामे खसल रहए।
कूकाबुरा सभकेँ कहैए- ककरो अन्हारमे देखबामे कोनो दिक्कत तँ नै भऽ रहल अछि?
सभ एकट्ठे बाजल- नै, ककरो कोनो दिक्कत नै भऽ रहल अछि।
कूकाबुरा बाजल- तखन चलू ओइ दिस। जतऽ बिजलौका रेतकेँ पघिला कऽ शीसा बना देने छै, ओइ स्थानकेँ ताकू। कारण जखन हम सभ एक हजार किलोमीटर प्रतिघण्टाक गतिसँ दौगि सकै छी तखन ई हेलीकॉप्टर तँ एतए एक लाख किलोमीटर प्रति घण्टाक गतिसँ उड़त। ओ चलैबला-वनस्पति हेलीकॉप्टरक सभटा तकनीकक अलगसँ उपयोग कऽ सकैए, ओ ओकर ईंधन, ईंजन, पंखाक प्रतिरूप बना सकैए। एक्सरे आदि उपकरणक प्रतिरूप बना सकैए। चलू…
आ “चलू..” क शब्द सुनिते सभ दौग लगलाह।
कएक घण्टा बीति गेल मुदा सगरो रेते रेत देखाइ पड़ि रहल छल।

चमकैत शीसाक प्लेटफॉर्म
सात घण्टाक बाद सभकेँ ओइ अन्हारमे एकटा शीसाक प्लेटफॉर्म देखा पड़लै।
ओतै एकटा हेलीकॉप्टर ठाढ़ रहै। सभ गोटे दौगबाक बदला झटकारि कऽ चलऽ लगला आ आस्ते आस्ते सभ गोटे सए किलोमीटर प्रति घण्टाक सामान्य गतिसँ चलऽ लगला आ हेलीकॉप्टर लग आबि ठाढ़ भऽ जाइ गेला। टुराकोस, तितली आ टिकुली हेलीकॉप्टरक पाछाँ चलि गेल आ कोनो रस्ते भीतर पैसबाक ब्योँतमे लागि जाइ गेल।




आस्था बाजल- ऐमे सँ हेलीकॉप्टर नीचाँ उतरै काल जइ ढाँचापर उतरैए, से गाएब अछि। सीढ़ी गाएब अछि। गेट खोलल गेल अछि आ कियो ने कियो ऐ सभ समानक गहिंकी नजरिसँ निरीक्षण केलक अछि।
तखने तितली आ टिकुली भनभनाइत आएल आ संगे बाजल- एकटा ऊर्मि आबि रहल अछि बालुक ऊपरसँ।
टुराकोस जे बड़ी कालसँ चुप छल बाजल- कोन दिशासँ।
तितली आ टिकुली संगे बाजल- उत्तर पश्चिम दिशासँ।
सभ गोटे उत्तर-पश्चिम दिशा दिस भगला।
तखने तितली आ टिकुली सभ गोटेकेँ इशारासँ ठाढ़ होइले कहलकै। सभ अपन गति कम केलक आ फेर ठाढ़ भऽ जाइ गेल।
तितली आ टिकुली किछु अकानलक। सभ कियो मरुस्थलक अवाज सुनलक। ई अवाज कखनो डरौन भऽ जाइ छलै तँ कखनो संगीतक सुर बनि जाइ छलै। अही दुनू स्वर आ लयक बीच एकटा तेसर ध्वनि अकानबाक प्रयास तितली आ टिकुली कऽ रहल छल।
तितली बाजल- ह्वेलक पीठ बला बालुक ढिमकापर सँ किछु विभिन्न तरहक अबाज आबि रहल अछि। चलैबला वनस्पति ओतै अपन काज कऽ रहल हएत।
आस्था बाजलि- ह्वेलक पीठबला बालुक ढिमका केम्हर अछि?
टिकुली बाजल- एतऽ सँ उत्तर-पूर्व दिशामे।
ओतऽ सँ उत्तर-पूर्व दिशामे सभ कियो दौड़ जाइ गेलाह।
लगभग सात-आठ घण्टाक बाद दूरेसँ ह्वेलक पीठ सन बालुक ढिमका देखा पड़ल।
टुराकोस बाजल- आब सम्हरि कऽ चलबाक अछि। एतऽ छोट-छोट ढिमकाक उड़लाक बाद ताल बनि जाइ छै। ओइमे कखनो काल पएर धँसि जाएत।
आस्था पुछलक- दलदल जकाँ।
कूकाबुरा खी-खी कऽ कए हँसैत बाजल- नै, तेहेन नै। एतऽ अहाँ ठेहुन भरि धँसब आ प्रयास केलासँ आसानीसँ पएर बाहर निकलि जाएत। खाली घबड़ेबाक नै अछि, से ध्यान राखब।
सभ फेर चलऽ लगला।
ह्वेलक पीठबला बालुक ढिमकापर गाछ-बृच्छ सभ चारू कात पसरल छलै। ई देखि सभ आश्चर्यचकित रहि गेला।
टुराकोस बाजल- चलैबला वनस्पतिक ई किरदानी अछि। किछु दिनमे ई गाछ-बृच्छ सभ सेहो चलऽ लागत।
तखने लग पासक वनस्पति सभ आस्थाकेँ हाय-हेलो करऽ लगलै।
आस्थाकेँ कने अपरतीब लगलै। ई सभ गाछ-बृच्छ तँ बड्ड नीकसँ बाजैए। महारक ओइपारक गाछ बृच्छक पात हिलितो नै अछि, मुदा ऐ दिस तँ गाछक पात सभ हिलि रहल अछि।
आस्था एकटा गाछसँ पुछलक- चलैबला एकाधटा वनस्पति जे महारक ओइपार सँ आएल छथि, से कतऽ छथि?
एकटा बच्चा गाछ बाजल- ह्वेलक पीठक पुच्छी लग हुनकर महल छन्हि, सतरंगी महल, जतऽ पनिसोखा अकाससँ नीचाँ खसै छै। ओ हमर सभक राजा छथि।
-ओतऽ गेनाइ ठीक हएत?, आस्थासँ सातो गोटे पुछलखिन्ह।
आस्था उत्तर देलक- किए नै? जँ मित्रतासँ गप भऽ जाए तँ झगड़ाक कोन खगता?
आस्थाक संगे सभ गोटे ह्वेलक पीठक ऊपरसँ होइत आगाँ बढ़ि जाइ गेलाह।
आधा घण्टाक बाद एकटा सतरंगी गेटक सोझाँमे ओ सभ आबि गेलाह जतऽ ह्वेल रूपी बालुक ढिमकाक पुच्छी नीचाँ जा कऽ खतम भऽ गेल छलै।
चलैबला वनस्पतिक समानान्तर परीलोक  
जखने आस्था अपन सातो संगीक संग ओइ चलैबला वनस्पतिक समानान्तर परीलोकक दरबज्जा लग पहुँचल कूकाबुरा खी-खी कऽ कए हँसए लागल। सभ ओकरा हँसैत देखि प्रसन्न भऽ जाइ गेल। एकटा अलौकिक प्रसन्नता सभक मुँहपर आबि गेलै। सभ अपन-अपन रंगक दरबज्जापर आबि गेल। पेंग्यूइन संगे आस्था ललका दरबज्जापर आबि गेल। ओकर सभक स्वागत कएल गेलै, एकटा चलैबला गाछक बच्चा स्वागत लेल बैसल छल। आस्थाकेँ लगलै जे एतऽ लोक हृदएसँ सोचि रहल अछि, मशीन नै हृदए काज कऽ रहल अछि।
पेंग्यूइन संगे आस्था आगू बढ़ल।
दूटा चलैबला गाछक बच्चा हुनका दुनू गोटेकेँ दूटा स्वागत कक्षमे लऽ गेल।
आस्थाकेँ ओतऽ अपन खाइ पीबैबला समान, जे ओ सपनामे अनने छलि, देखा पड़लै। ओकरा लगलै जे ओ साँस लऽ पाबि रहल अछि।
ओकरा लगलै जे ओकरा खूब जोरसँ भूख लागल छै।
ओ ओतऽ राखल बिस्कुट आ आन खेनाइ खाए लागल।
फेर कने कालक बाद ओ खिड़कीसँ बाहर देखलक।
ओतऽ एकटा बिजलौकासँ पघिलल शीसाक बड़का मैदानमे ओहने छोट-छोट हेलीकॉप्टर ओकरा देखा पड़लै, जेहन हेलीकॉप्टर आस्था सपनामे अनने छली। चलैबला वनस्पति पायलट सभ ओकरा उड़ा रहल छल आ नीचाँ आनि रहल छल।
तखने ओ छोट वनस्पतिक चलैबला बच्चा सूचना दैत बाजल- दुनू राजा एतऽ अहाँसँ भेँट करै लेल आबि रहल छथि।
दुनू राजा किछु कालक बाद एला। दुनू वनस्पति रहथि, सोचैबला-चलैबला।
आस्था हुनका सभसँ पुछलक- की अहाँ परीलोकक रानीकेँ खतम करैबला छी? परीलोककेँ नष्ट करैबला छी?
दुनू राजा बजला- कोनो परीलोक नै छै आ नहिये कोनो रानी ओतऽ छै। की अहाँकेँ रानीसँ भेँट कराओल गेल छल?
आस्था बाजलि- नै, से तँ भेँट नै कराओल गेल छल।
दुनू राजा बजला- ओतए किछु विक्षिप्त वैज्ञानिक सभक राज भऽ गेल छै। हमरा पता चलल, तेँ हम महारक ऐपार आबि गेलौं। ऐ कात ओ सभ माहुर सभ सन पदार्थक अवशेष फेकै छथि आ ई क्षेत्र एकटा रेगिस्तान बनि गेल अछि। मुदा हमर सभक ठाढ़िसँ आब जीवन पसरि रहल अछि। आब अहूँ सभक देहसँ सातो दरबज्जामे आठ तरहक जीव पसरत। अहाँ लड़ाइ नै वार्ता चुनै लेल अपन संगी सभकेँ प्रोत्साहित केलौं, से हम दूर-संचालित एक्सरे-कैमरासँ देखि रहल छलौं। ई तँ समानान्तर सुधार गृह मात्र अछि।
कनी कालमे दुनू राजा चलि गेला।
आस्था सोचए लागल- ई सभ तँ नीक लोक छल। आस्था ओइ छोट वनस्पतिक चलैबला बच्चाकेँ पेंग्यूइनकेँ बजा कऽ आनै लेल कहलक, फेर किछु सोचि कऽ मना कऽ देलक।
आस्थाकेँ निन्न आबए लगलै। ओ सोचए लागल जे कोना सभ ऐ तरहरिक छद्म परीलोक आ ओकर समानान्तर सुधार गृहसँ बाहर जाए।
आस्था चाहलक जे ओकरा निन्न आबै आ सपना आबै। सभ महादेशक धोधरि बन्न भऽ जाए आ विक्षिप्त वैज्ञानिकक कथित परीलोक खतम भऽ जाए। आ तखन समानान्तर सुधार गृह अपने खतम भऽ जाएत।
आस्था सपनाए लागल। समानान्तर सुधार गृहक दुनू राजा सपना पठेने रहै।
आ आस्था चन्ना गाछी फेरसँ पहुँचि गेलि। सपना सत्य होइ छै, आ से भेलै। धोधरि बन्न भऽ गेलै। आब कोनो माल-जाल, चिड़ै निपत्ता नै होइ छै।
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बा: ओम।
मुदा ओम तँ सुति गेल छल। कतऽ धरि खिस्सा सुनलक से काल्हि रातिमे पुछबै- ई सोचैत बा सेहो सुति रहली।