Sunday, August 24, 2014

८३म सगर राति दीप जरय नन्द विलास रायक संयोजकत्व मे भपटियाहीमे ३० अगस्त संध्या ६ बजे सँ ३१ अगस्त भोर ६ बजे धरि आयोजित अछि। ई आयोजन नारी केन्द्रित लघु आ विहनि कथापर आयोजित अछि। अहाँ सादर आमंत्रित छी।

८३म सगर राति दीप जरय नन्द विलास रायक संयोजकत्व मे भपटियाहीमे ३० अगस्त संध्या ६ बजे सँ ३१ अगस्त भोर ६ बजे धरि आयोजित अछि। ई आयोजन नारी केन्द्रित लघु आ विहनि कथापर आयोजित अछि। अहाँ सादर आमंत्रित छी।

८३म सगर राति दीप जरय नन्द विलास रायक संयोजकत्व मे भपटियाहीमे ३० अगस्त संध्या ६ बजे सँ ३१ अगस्त भोर ६ बजे धरि आयोजित अछि। ई आयोजन नारी केन्द्रित लघु आ विहनि कथापर आयोजित अछि। अहाँ सादर आमंत्रित छी।

८३म सगर राति दीप जरय नन्द विलास रायक संयोजकत्व मे भपटियाहीमे ३० अगस्त संध्या ६ बजे सँ ३१ अगस्त भोर ६ बजे धरि आयोजित अछि। ई आयोजन नारी केन्द्रित लघु आ विहनि कथापर आयोजित अछि। अहाँ सादर आमंत्रित छी।

विदेह भाषा सम्मान (समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान) २०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह) २०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास) २०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह) २०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो- तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद)

विदेह भाषा सम्मान
(समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान)
२०१४ मूल पुरस्कार- श्री नन्द विलास राय (सखारी पेटारी- लघु कथा संग्रह)
२०१४ बाल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (नै धारैए- बाल उपन्यास)
२०१४ युवा पुरस्कार - श्री आशीष अनचिन्हार (अनचिन्हार आखर- गजल संग्रह)
२०१५ अनुवाद पुरस्कार - श्री शम्भु कुमार सिंह ( पाखलो-  तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद)

Monday, May 26, 2014

होली एलै

होली एलै होली एलै
सबहक मोनमे खुशी जगेलै
रंग बिरंगक सपना अछि अनने
वसन्तक हबा संग झूमि एलै।

सीरक तोसक दूर भगा कए
डारि पातकेँ हरियर केलक
अँगना दौढ़ीमे फूल फुला कए
चाहुदिस हँसैत होली एलै।

धिया किनलनि फुचुक्का
नेना रंग आओर गुलाल
हाट बाजारमे हल्ला भेल छै
सबतरि भरल अबीर लाल गुलाब।

केकरो माथमे अबीर भरल अछि
केकरो मुँह मलल अछि रंग
केकरो हाथ मलपुआ भरल
कियो पिबैत भरि लोटा भंग।
©जगदानन्द झा ‘मनु’

Saturday, May 24, 2014


Thursday, May 22, 2014

हमर अभिलाषा

हम तँ बनब किसान देशकेँ
अथवा बनब जवान देशकेँ।


माएक भूमिपर मऽरै बला
सत्य कर्म हिम्मत  बला
दुश्मनकेँ हम मारि भगाएब
हिम्मत अपन सभकेँ देखाएब
सोचल नै केखनो अनकर होएत
जखन हम देशक जवान होएब।

तनपर वर्दी होएत जखन हमर
मृत्युओ जीवन होएत हमर
अन्तिमो छनमे प्राण दए कऽ
देशकेँ नै हारब हम जी कऽ
छुल-छुल दुश्मन मूतत देख कऽ
जखन हम चलब सीना तानि कऽ।

हम तँ बनब किसान देशकेँ
अथवा बनब जवान देशकेँ।


घर-घर दाना पहुँचाएब अन्नकेँ
पुत्र बनि कए हम माएक भूमिकेँ
खून पसीनासँ धरतीकेँ पटाएब
कखनो नै मोनमे आलस लाएब
अन्न करब उपजा हम मनसँ
सजाएब सभटा सपना हम तनसँ।


प्रकृतिकेँ आगू नै हम झूकब
कर्म अपन हम निरन्तर करब
माँथ अपन ऊँच उठा कऽ
कहबै सभकेँ शान देखा कऽ
हम तँ छी किसान देशकेँ
कर्म जएकर सेवा खेतकेँ।


हम तँ बनब किसान देशकेँ
अथवा बनब जवान देशकेँ।
©जगदानन्द झा ‘मनु’

Wednesday, May 21, 2014

छुट्टी भऽ गेलै


टन टन टन टन घंटी बजलै
धिया पुताकेँ मनमा दोललै
मौलाएल मुँह झट हँसि गेलै
हजारो कमल जेना संग फूलि गेलै
हाथमे झोड़ा लए कऽ दौड़ल
खुशीसँ मोनमे दही पौड़ल
नै छै चिंता काल्हि की हेतै
नै छै चिंता आइ की हेतै
सबहक मोनमे खुशी छै ऐकेँ
छुट्टी भऽ गेलै आइ इस्कूलकेँ
छुट्टी भऽ गेलै छुट्टी भऽ गेलै
आइ इस्कूलकेँ छुट्टी भऽ गेलै
@ जगदानन्द झा ‘मनु’

Monday, April 28, 2014

प्रकृति

प्रकृति अहाँक कोरामे
की-की नुकाएल अछि नै जानि
देखी नजरि उठा कए जतए
नव-नव रंग-विरंगकेँ पानि

नुकाएल अनन्त ब्रम्हान्ड अहाँमे
कोटी-कोटी ग्रह नक्षत्र धेने छी
हमर मोनकेँ अछि जे हरखैत
एहन जीव चौरासी लाख धेने छी

श्यामल सुन्नर साँझक रूप
रौद्ररूप धारण अधपहरमे कएने
नव यौवन केर सभटा सुन्नरता
भोरक छविमे अहाँकेँ पएने

जाड़ गर्मी बरखा वसन्त
चारि अवश्था वरखक अहाँकेँ
माए जकाँ हमरा लोड़ी सुनबैत अछि
अन्न-धन दैत सभकेँ ई रूप अहाँकेँ
*****
जगदानन्द झा 'मनु'
               

Monday, March 31, 2014

कथा वाचन- लेखन पाठशाला (बाल कथाक विशेष संदर्भमे)

कथा वाचन- लेखन पाठशाला (बाल कथाक विशेष संदर्भमे)

मैथिलीमे कथा वाचन, विशेष क' नेना भुटका लेल बाल कथा वाचनक परम्परा बड्ड पुरान रहल अछि। लोक गाथाक रातिक राति, दिनक दिन प्रदर्शन, बाल सुलभ मोन लेल ओकर छोट वर्जनक गद्य- पद्य मिश्रित एक आ बेशी राति चलैबला दादी- नानीक कथा; दादी- नानी आ बाबा- बाबूक सुनाएल आन लोककथा एकर विभिन्न रूप अछि जे मिथिलाक बालक- बालिकाक मोन मोहने अछि।ऐसँ विपरीत सप्ता डोरासँ ल' ' मधुश्रावणी आ बिहुलाक कथाक जानकारी मात्र बालिके धरि सीमित अछि, एक्के घरमे रहितो किछुए बालक मौगियाहा संज्ञा भेटबाक डरक संग ऐ कथापाठमे सम्मिलित हेबाक साहस करै छथि।
कथाक बीच गीत, कहबी, खेल सेहो होइए। खेल कथाक बालक- बालिका संभ द्वारा वाचन- गायन होइत अछि, आ खेला सेहो चलिते रहैत अछि, कोनो दादी- नानीक प्रवेश नै, कोनो बाबू- बाबा बेदराक खेलमे घुसि नै सकै छथि।
कथापाठक एतेक सुन्दर परम्पराक अछैत मैथिली बालकथा किए असफल भ' गेल, बा अखन धरि असफल अछि। जँ लिली रे केँ छोड़ि दी तँ ई कहैत कनियो संकोच नै जे साहित्य अकादेमी पोषित, से ओ छपाई हुअए बा पुरस्कार, मैथिली बाल कथा साहित्य , बाल साहित्य अछिये नै। आ जँ अहाँमे प्रतिभा नै अछि तँ अनुवाद करू, मुदा प्रायोजित अनुवादक स्तर एहन जे बच्चाक बापक दिन नै छिऐ जे एक्को पैराग्राफ़ पढ़ि लिअए, तते ने मुँह कोचिआबए पड़ै छै।
साहित्य अकादेमीसँ २४ भाषासँ संकलित बाल कथा निकालल गेल। मैथिलीयोक कोटा छै आ रामदेव झा दुनू बापुतक बालकथा कोना नै रहत, नाटक संग्रह एतै तँ फट नाटक तैयार, तही तर्जपर। लिली रे क कथा मुदा सुन्नर अछि। मैथिलीक ऐसँ बदनामी होइ छै, दुनियाँ बुझैए जेमैथिलीक कथाकार बाल कथाक माने बुझबे नै करै छथि।
८२ म सगर राति बालकथा केन्द्रित रहत। ओइ संदर्भमे बाल कथा वाचन- लेखन पाठशालाक आरम्भ कएल जा रहल अछि।
विदेह शिशु उत्सवमे जगदानन्द झा 'मनु'क चोनहा आएल छलन्हि। बाल मनोविज्ञानपर आधारित ई उपन्यास बाल कथा लिखनहारक लेल पाठ्यक्रमक समान अछि, केना कथा आगाँ बढ़ाओल जाए, आ समाप्त कएल जाए, कथा वस्तुक नवीनता एकरा विशिष्ट बनबैए। विदेह शिशु उत्सव ऐ लिंकपर उपलब्ध अछि:-
https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/
से बालकथाक लेखन एना हुअए जे ओ पढ़ै आ सुनै, दुनूमे नीक लागए। ई क्लोजेट नाटक सन हेबाक चाही, जे मंचन लेल नै, असगरे पढ़बाले बा किछु गोटे संग ज़ोर- जोरसँ सुनबा- सुनेबा लेल लिखल जाइए।
सरल विचार, सरल शब्दावली आ सरल भाषा श्रेष्ठ बाल कथा लेखनक चाभी अछि।
जेना ऋगवेदक जल प्रलय, मनु आ महामत्स्यक कथा, सरस्वती नदी, अरायुक्त रथक विवरण, ई सभ आरम्भिक बाल कथाक आकृति देखबैत अछि तहिना अवेस्ताक गिलगमेशक कंथा सेहो। ऋगवेदोसँ पहिने गाथा, नाराशंसी आदिक मौखिक साहित्य छल आ ओइ लेल ऋगवेदमे गाथापति, गाथिन आदिक प्रयोग अछि।
"पंचतंत्र" आ ओकर किछु कथाक पुनर्लेखन "हितोपदेश" सँ बहुत पहिने जातक कथा बाल कथा कहलक आ सेहो चिड़ै चुनमुनीक संग मालजाल आ जानवरक माध्यमसँ, ओना जातककउद्देश्य बौद्ध धर्मक प्रचार सेहो रहै। अही तरहेँ पंचतंत्र बाल कथा कहैत कहैत स्त्री-शूद्रक प्रति पूर्वाग्रह कथामे पैसेलक, आ तेँ ओकर पुनर्लेखनक आवश्यकता अनुभूत भेल। ऋगवेदक आख्यान संवादकेँ जन्म दै छल, जे पौराणिक कथा ख़त्म क' देलक आ तेँ ओइ पौराणिक कथा सभक पुनर्लेखन अखुनका हिसाबे हेबाक चाही।
आधुनिक बाल कथा केहुन हुअए?
ओइमे आधुनिक विज्ञान द्वारा पसारल नीक तत्वक संग पर्यावरण चेतना सेहो हेबाक चाही। माने कथा बुद्धिपरक नै व्यवहारपरक हेबाक चाही।

बालकथामे मनोरंजन आ ज्ञानक समावेश लेल विज्ञान, समाज विज्ञान परक कथा लिखबाक आवश्यकता अछि। बच्चा अपन धरोहरिकेँ बुझए, तेँ लोक कथा, परीकथा, जादू कथा कहल जा सकैए मुदा ई अंधविश्वास नै बढ़बए तइ तरहेँ ओकर लेखन पुनर्लेखन हेबाक चाही।

Monday, March 24, 2014

82म “सगर राति दीप जरय” कथा गोष्ठीक हकार

हकार 
82म सगर राति दीप जरय कथा गोष्ठीक आयोजन मेंहथमे 31 मइ 2014 शनि दिन भऽ रहल अछि। ई आयोजन मेंहथमे 31 मइ 2014 संध्या ५ बजे सँ शुरू भऽ कऽ 01 अप्रैल 2014 भोर धरि हएत। ई विशुद्ध रूपसँ बाल कथा (विहनि आ लघु कथा) विशेषांक रहत। संयोजक- गजेन्द्र ठाकुर। अहाँ सभ कथाकार बाल कथा (विहनि आ लघु कथा)क संग सादर आमंत्रित छी।- आयोजक – गजेन्द्र ठाकुर 

८१म सगर राति दीप जरय कथा गोष्ठीक आयोजन देवघरमे २२ मार्च २०१४ शनि दिन संध्यासँ २३ मार्च २०१४ रवि दिन भोर धरि सम्पन्न। ई आयोजन देवघरमे बमपास टाउन स्थित "बिजली कोठी" नम्बर ३ मे श्री ओम प्रकाश झा जीक संयोजकत्वमे सम्पन्न भेल। ८२ म सगर राति ३१ मइ २०१४ केँ मेँहथ गाममे हएत। ई विशुद्ध रूपसँ बाल कथा (विहनि आ लघु कथा) विशेषांक रहत। संयोजक- गजेन्द्र ठाकुर।

८१म सगर राति दीप जरय कथा गोष्ठीक आयोजन देवघरमे २२ मार्च २०१४ शनि दिन संध्यासँ २३ मार्च २०१४ रवि दिन भोर धरि सम्पन्न। ई आयोजन देवघरमे बमपास टाउन स्थित "बिजली कोठी" नम्बर ३ मे श्री ओम प्रकाश झा जीक संयोजकत्वमे सम्पन्न भेल।
८२ म सगर राति ३१ मइ २०१४ केँ मेँहथ गाममे हएत। ई विशुद्ध रूपसँ बाल कथा (विहनि आ लघु कथा) विशेषांक रहत। संयोजक- गजेन्द्र ठाकुर।