Wednesday, July 25, 2012

बाल गजल


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बाल गजल


बिनु पानिक  नाउ चलाएब हम 
बिनु चक्काक गाडी बनाएब हम 

हमर मोन में तँ जेँ किछु आएत 
बिन सोचने सभ सुनाएब  हम 

अपन ब्याह में हम नहि जाएब 
सराध दिन बजा बजाएब  हम 

कनियाँ केँ लय ओकर नैहर सँ 
सासुर सँ खूब  कतियाएब हम

'मनु' मन चंचल टोनए सभकेँ 
केकरो हाथ नै घुरि आएब हम  

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१३)

बाल गजल


उजरा भात गढका दूध बड़का थारी चाही
नै खेलेबौ कनिया पुतरा नबका गाड़ी चाही

भैया पहिरै नबका अंगा दशमी आ फगुआ
बेटा हमहु छियौ तोहर आब नै छारी चाही

भैया गेन खेलाई छौ टुकटुक हम छी ताकै
दूध भात भ कात नै हेबौ हमरो पारी चाही

काकाजी कान मचोरथि तोडी जखन टुकला
अपन लीची अपने झाँटी हमरा बाड़ी चाही

श्यामा लाई खूब खुवाबे टाटक भुरकी बाटे
ओहि टाटके काटि खसाबी हमरा आरी चाही

बाल गजल


खा ले रे बौआ दूधे भात
ठुनकि नै हो ठाढ कात

पढि बनबे तू बी डी ओ
मोन राख  हमर बात

पैघे के सब दै छै ध्यान
तोंही पेबें पहिल पात

छौ जे दुत्कारैत एखन
कान पाथि सुनतौ बात

मोन लगा जॉं पढबे तू
टाका के हेतौ बरसात

बाल गजल


छुनकी हीरा गीतिया सोनू
पाछू लागि सब रेल बनू

ईंजन बनि हम आगू छी
गार्ड बनता अपन मोनू

दूध सोहारी कोयला पानी
सकरी टीसन ठाढ गोनू

फ्री टिकट सब आबि चढु
सीट सबटा अपने जानू